Thursday, 9 July 2026

प्यार के कुछ पल

आज कल ऐसा लगता है 

कि प्यार के पल, सिर्फ महंगी गहनों में 

खीमती रेस्टोरेंट, में खाना खाने में 

खर्चीली विदेश यात्राओं में रखा है  


प्यार के पलों को  एहसास, करने से ज़्यादा 

सोशल मीडिया में पोस्ट करना  महत्वपूर्ण बन गया  है 

जीवन साथी का जन्म दिन पर, कितना कीमती उपहार दिया 

कितने पैसे खर्च किये  ?, यही प्यार का मानदंड बन गया है  


एक ज़माना ऐसा भी था,  जब पैसा थोड़ा कम ही सही 

प्यार छोटी छोटी बातों में दिखाई देता था 

एक साथ सिनेमा देखने में 

छत से , हाथ में हाथ मिलाके, चंद्रमाँ को  देखने में 

खाद्य पदार्थ  के आलावा, प्यार भर के, खाना पकाने  में 

पति से अप्रत्याशित उपहार, साढ़ी की रूप में  मिलने में  


पल  को, प्यार के पल बनाने केलिए 

सिर्फ चाहिए, एक दुसरे केलिए सम्मान 

मोबाइल फ़ोन  के रहते हुआ भी 

एकजुटता, एक साथ समय बिताने की इच्छा 


सरल आनंद वाली पल , रहता है प्यार से भरपूर 

वही बनाता  है, कुछ पलों को, हमेशा केलिए यादगार ! 

राजीव  मूथेडात

NB: This poem was included in the ALS Anthology 2025 "Sahitya Manjusha: 





 


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